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प्राकृतिक खूबसूरती का खजाना है मानिला गांव

कई लोगों को किसी प्रसिद्ध भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने की अपेक्षा दूरदराज स्थित शांत और सुरम्य स्थान ज्यादा पसंद है। ऐसी जगहों की खास बात यहाँ का प्राकृतिक वातावरण, जैव विविधता, पारम्परिकता और संस्कृति होती है। मानिला ऐसी ही जगहों में से एक जगह है। मानिला वैसे तो उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित एक छोटा सा गांव है, पर खूबसूरत इतना है कि इस जगह पर हर कोई आना चाहता है और पूरा गांव दूर-दूर से आए सैलानियों से भरा रहता है। दिल्ली से मानिला का पूरा रास्ता घने जंगलों से होकर गुजरता है, चारों तरफ हिमालय की ऊँची-ऊँची चोटियां दिखाई देती है।

इस जगह पर पहुंचने के बाद लगता है कि हिमालय श्रंखला की त्रिशुल से पंचचुल्ली तक की सभी चोटियां मानों कि स्वागत में खड़ी हों। यह गांव हिमालय का एक बहुत ही मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है। इस जगह में नंदा देवी की चोटियां बिल्कुल स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। मानिला को वैसे तो मानिला देवी मंदिर के कारण जाना जाता है, पर अभी इस जगह पर सैलानियों के पहुंचने का सबसे बड़ा कारण यहां का मौसम और प्राकृतिक वातावरण है।

समुद्र तल से लगभग दो हजार की उचाई पर स्थिति होने के नाते यह जगह हिल स्टेशन सा अनुभव कराती है। मानिला में सूर्योदय और सूर्यास्त को देखना भी काफी रोमांचक होता है। हिमालय की इस श्रृंखला से सूर्योदय और सूर्यास्त को देखने की जो अनुभूति है, वह कभी नहीं भूलने वाली होती है। ऐसा लगता है कि सूर्य की सुनहरी चमक हमारे भीतर कहीं उतर आयी है और मन प्रफुल्लता से भर उठाता है। मानिला एक छोटा गांव है, जहां आप प्राकृति के शांत वातावरण में अपने प्रियजनों के साथ अच्छा समय बिता सकते हैं। गांव घूम सकते हैं और ग्रामीणों के साथ बातचीत करके स्थानीय संस्कृति के बारे में भी काफी कुछ जान सकते हैं। गांव के आस-पास कई मंदिर हैं, जहां आप जा सकते हैं।

मानिला में देवदार और चीड़ के पेड़ बहुतायत संख्या में है और पूरी की पूरी घाटी बुरांश के फूलों से किसी दुल्हन की तरह लाल जोड़े में सजी नजर आती है। इस वजह से यहां का प्राकृतिक सौंदर्य और भी निखर जाता है। इस जगह पर सेब, नाशपाती, अखरोट, संतरा, माल्टा, खुबानी की भी अच्छी पैदावार होती है। कहीं-कहीं पर आम, पपीते और केले के पेड़ भी दिख जाते हैं।

भिकियासैंण का पैदल मार्ग मनिला से महज 13 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां पहुंचकर आप संगम देख सकते हैं। यह एक सुंदर गांव होने के साथ-साथ कुमाउ के इतिहास का गवाह भी है। ऐतिहासिक और धार्मिक से भी मानिला क्षेत्र का बहुत महत्त्व है। ऐसा बताया जाता है कि यह कभी कत्यूरी राजाओं का गढ़ था। इस जगह पर मां मानिला देवी के दो मंदिर है। एक का नाम मल्ला मानिला मंदिर है, दूसरे का तल्ला मानिला मंदिर। कुमाउनी भाषा में मल्ला का अर्थ उपर होता है और तल्ला का नीचे।

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