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मानसून में लिवर संक्रमण का खतरा ज्यादा, फूड और लाइफस्टाइल से जुड़े ये 4 तरीके आपको स्वस्थ रखेंगे

बारिश में हेपेटाइटिस ए और ई के संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा होता है

अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ में प्रकाशित शोध् में पाया गया है कि मौसम का सीधा प्रभाव लिवर पर पड़ता है। मानसून में लिवर संबंधी बीमारियों हेपेटाइटिस ए और ई का खतरा बसे ज्यादा बढ़ जाता है। क्योंकि दोनों बीमारियां दूषित भोजन और पानी के कारण होती है। साथ ही बारिश के मौसम में तले हुए और चटपटे भोजन के अधिक सेवन से कोलेस्टाॅल बढ़ने की आशंका रहती है। धूप की कमी से भी लिवर की कार्यप्रणाली धीमी पड़ती है। बढ़ा हुआ कोलेस्ट्राॅल आवश्यक एंटीऑक्सीडेंट और पाचन में सहायक ग्लूटाथियोन एंजाइम को भी कम कर देता है। ग्लूटाथियोन की कमी से लिवर के खराब होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे में आप इन आदतों को अपनाकर लिवर को स्वस्थ रख सकते हैं।

रोज 30 मिनट की वाॅक, इससे लिवर की सक्रियता बढ़ती है

1. लाइफ स्टाइल- लेट नाइट खाने से बचें लिवर रात 11 से 3 के बीच खुद को तैयार करता है

रात 11 से 3 बजे के बीच लिवर खुद को अगले दिन के लिए तैयार करता है, लेकिन इस दौरान शरीर को खाना पचाने के लिए काम करना पड़ता है तो वह डिटाॅक्सीफिकेशन के काम को ठीक से नहीं कर पाता। इससे शरीर में विषाक्त पदार्थों की मात्रा बढ़ती है। रात के भोजन और सुबह के नाश्ते के बीच कम से कम 10 से 12 घंटे का अंतर जरूर रखें।

2. फूड-खाने में रंगीन फल, सब्जियां, अलसी, चिया सीड्स को शामिल करें, ये शरीर से टाॅक्सिंस हटाती हैं

भोजन में रंगीन फल सब्जियों के साथ चिया सीड्स, बीन्स और ओट्स को शामिल करें। इनमें घुलनशील फाइबर होता है। यह फाइबर टाॅक्सिंस को बाहर निकालने में लिवर की प्रतिदिन मदद करते हैं।

3. हाइजीन-हाइजीन का विशेष ध्यान रखें, हेपेटाइटिस ए और ई का खतरा कम होता है

अच्छी तरह पका हुआ और साफ भोजन ही करें। पानी का विशेष ध्यान दें। सड़क पर मिलने वाली खुले में रखी चीजों को खाने से बचें। कच्चा सलाद और सब्जियों के सेवन में विशेष सावधानी बरतें।

4. एक्सरसाइज-वाॅक के अलावा लिवर प्रेस, स्पाइनल ट्विस्ट जैसी एक्सरसाइज करें

रोज 30 मिनट वाॅक करें। यह लिवर की इंसुलिन के प्रति सेंसिटिविटी बढ़ाती हैं। इससे लिवर का फैट कम होता है। लिवर प्रेस और स्पाइनल ट्विस्ट एक्सरसाइज विशेष रूप से लिवर को फायदा पहुंचाती हैं।

क्या है हेपेटाइटिस

लिवर शरीर का सबसे बड़ा ऑर्गन है जो पोषक तत्वों को प्राॅसेस करने के साथ रक्त को शुद्ध करता है। संक्रमण से लड़ता है। जब लिवर में सूजन या उसे क्षति पहुंचती है तो इसकी पूरी कार्य प्रणाली प्रभावित हो जाती है। हेपेटाइटिस वायरस के कारण होता है। यह ए, बी, सी, डी और ई मुख्यतः पांच प्रकार का होता है। जिसमें से हेपेटाइटिस ए और ई मुंह के माध्यम से होने वाले संक्रमण यानी दूषित भोजन और पानी के कारण या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के कारण होता है। बारिश में इसकी संभावना सबसे ज्यादा होती है। चिंता की बात यह है कि कई बार हेपेटाइटिस संक्रमण के लक्षण तुरंत सामने नहीं आते हैं। इसमें कई सप्ताह का समय लग सकता है। इसके अलावा पीड़ित को ठीक होने में कई बार तीन माह तक का समय लग जाता है। थकान, भूख की कमी, उबकाई, उल्टी और पेट दर्द हेपेटाटिस के प्रमुख लक्षण हैं।

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