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अपनी डाइट से कन्ट्रोल कर लें  स्ट्रोक के जोखिम को

स्ट्रोक के बढ़ते मामलों से यह साफ होता है कि यह जल्द ही भारत में एक महामारी का रूप लेने वाला है। भारत की अधिकश युवा आबादी (20-40 की उम्र वाले) इसकी चपेट में है। जहां स्ट्रोक के 80 प्रतिशत मामलों को रोका जा सकता है, इसके बाद भी ये देश के युवाओं को लगातार अपनी चपेट में ले रहा है। स्ट्रोक के जोखिम और इससे बचने के उपायों के बारे में लोगों को जागरुक करना न सिर्फ डाॅक्टरों की ड्यूटी है, बल्कि युवाओं को भी अपनी जीवनशैली में जरूरी बदलाव लाने चाहिए जिससे वे स्ट्रोक को महामारी बनने से रोक सकें।

लाइफस्टाइल की खराब आदतों, विशेषकर खान-पान की खराब आदतें जैसें की जंक फूड, मीट और अंडे आदि के कारण पिछले एक दशक में स्ट्रोक, कोरोनरी धमनी और ब्रेन हेमरेज के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है। खराब जीवनशैली की आदतों में तनाव, धूम्रपान, शराब का अत्यध्कि सेवन, जंक फूड का सेवन और शरीरिक गतिविधि में कमी आदि शामिल हैं, जो भविष्य में स्ट्रोक का कारण बनती हैं, जबकि एक हेल्दी डाइट स्ट्रोक के 80 प्रतिशत मामलों को रोकने में मदद करती है।

स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण और संकेत

चेहरे, बांह, पैर (खासकर शरीर के एक तरफ में) अचानक संवेदन शून्यता या कमजोरी।

अचानक भ्रम की स्थिति, बोलने या किसी बात को समझने में दिक्कत।

एक या दो आंखों से देखने में अचानक दिक्कत।

चलने में अचानक तकलीफ, चक्कर आना, संतुलन या समन्वय का अभाव।

आमतौर पर सब्राकनोइड हेमरेज में बिना वजह अचानक भयंकर सिरदर्द होने लगता है। इसके साथ ही उल्टी, दौरा या मानसिक चेतना का अभाव जैसी शिकायतें भी होती हैं। इन मामलों में नाॅन-काॅन्ट्रास्ट सीटी तत्काल करा लेना चाहिए।

स्ट्रोक का उपचार, स्ट्रोक के प्रकार, स्ट्रोक के द्वारा मस्तिष्क का कौन सा भाग प्रभावित हुआ है और सबसे महत्वपूर्ण है कि कितनी जल्दी मरीज को अस्पताल लाया जाता है और स्ट्रोक के उपचार के लिए उसका डायग्नोसिस किया जाता है, जैसे कारकों पर निर्भर करता है। स्ट्रोक के द्वारा जो नुकसान होता है उसे रोकने के लिए क्लाॅट बस्टिंग ड्रग्स के पास 4-5 घंटे से कम का समय होता है। जिन मरीजों के मस्तिष्क की बड़ी धिमनियां ब्लाॅक हो गई हैं उनके लिए मेकेनिकल थ्राॅम्बेक्टोमी की सलाह सबसे अधिक दी जाती है। ब्लाॅक हुई ध्मनियों को खोलने के लिए, डाॅक्टर मूल क्षेत्र की ध्मनी से मस्तिष्क के प्रभावित क्षेत्र के लिए एक केथेटर डालते हैं। स्टेंट खुलता है और क्लाॅट को जकड़ लेता है, डाॅक्टर उस स्टेंट को क्लाॅट सहित बाहर निकाल लेते हैं। इसके लिए विशेष सक्शन ट्यूब का भी इस्तेमाल किया जाता है। यह प्रक्रिया स्ट्रोक के गंभीर लक्षणों के 6 घंटे के अंदर की जानी चाहिए। 80 प्रतिशत से अधिक मरीजों में, ब्लाॅकेज को खोल दिया जाता है और धमनियों में प्रवाह को पुनः स्थापित कर दिया जाता है। लगभग 60 प्रतिशत मरीजों की हालत में तेजी से सुधार आता है और 3 महीने के अंदर वो अपने काम स्वंय करने लगते हैं।

स्ट्रोक की रोकथाम में पौष्टिक आहार की भूमिका

जोखिम के कारकों की पहचान के साथ एक हैल्दी डाइट स्ट्रोक की रोकथाम में एक अहम भूमिका निभाती है। हैल्दी डाइट न केवल स्ट्रोक के जोखिम कारकों को कम करने में मदद करती है, बल्कि समग्र स्वास्थ्य को भी सही रखने में मदद करती है। स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाने वाले कारकों में उच्च रक्तचाप, डायबिटीज और कोलेस्ट्राॅल का उच्च स्तर शामिल हैं, जो हेल्दी डाइट की मदद से संतुलित रखे जा सकते हैं।

उच्च रक्तचाप को रोकने के लिए डाइट

विशेष आहार या पोषक तत्वों के सेवन की सीमा को तय करने से कोई फायदा नहीं है। ऐसी कई डाइट गाइडलाइंस हैं, जो पूरे डाइट पैटर्न के पालन की सलाह देती हैं। इन गाइडलाइंस के अनुसार मीट का सेवन कम से कम करना चाहिए और ताजे फल व सब्जियों का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए। सब्जियां, फल और कम वसा वाले डेयरी पफूड (जैसे दूध्, दही आदि) के साथ कम फैट वाला आहार उच्च रक्तचाप के स्तर को कम करने में मदद करता है। अपने खाने में मछली, गेहूं, नट्स और पोल्ट्री को शामिल करें और रेड मीट, मिठाई और चीनी वाले जूस का कोल्डिंªक आदि का सेवन कम कर दें। यह डाइट प्लान सही पोषण की मदद से आपके रक्तचाप को संतुलित बनाए रखने में मदद करता है। यदि उच्च रक्तचाप को केवल हेल्दी डाइट और मेडिकेशन से रोका जा सकता है, तो इसके अनुसार स्ट्रोक के 90 प्रतिशत मामलों को रोका जाा सकता है।

शाकाहारी आहार पेड़-पौधे आधरित आहार

इस आहार में फैट कम नहीं होता है लेकिन यह कम ग्लाइसेमिक वाला आहार होता है जिसमें मात्रा 40 प्रतिशत कैलोरी होती है, जो केवल लाभकारी वसा जैसे जैतून व कनोला तेल से मिलती है। इसके अलावा यह कैलोरी गेहूं, फल, सब्जियां और फलियां आदि से मिलती है। डायबिटीज और उच्च रक्तचाप वाले मरीजों में स्ट्रोक होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। डायबिटीज रक्त वाहिकाओं और नसों को नुकसान पहंुचा सकती है, जो स्ट्रोक का कारण बनता है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, दालचीनी, मेथी के बीज, हल्दी की चाय, जीरा, लहसुन, इलायची, सौंफ, अदरक, आंवला, पालक, लौकी, फाइबर युक्त आहार, बादाम, करेला आदि चीजों को अपनी डाइट में शामिल करने से स्ट्रोक के खतरे में 47 प्रतिशत कमी लाई जा सकती है। अमेरिका के हालिया दिशानिर्देशों के अनुसार, कोलेस्ट्राॅक का सेवन कम से कम किया जाना चाहिए। मछली या चिकन की तुलना में रेड मीट में फैट चार गुना ज्यादा होता है, जो स्ट्रोक के खतरे को बढ़ाता है।

स्ट्रोक वाले मरीज किस प्रकार की डाइट का पालन करें?

जिन मरीजों में स्ट्रोक की संभावना अधिक है, उन्हें मीट, रेड मीट और अंडे के पीले हिस्से के सेवन से बचना चाहिए। उन्हें लाभकारी तेल जैसे जैतून और कनोला, गेहूं, सब्जियां, फलों और फलियों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। अंडे का सफेद हिस्सा प्रोटीन का अच्छा स्त्रोत होता है, इसलिए आमलेट और अंडे व सलाद से बने सैंडविच का सेवन करना चाहिए। बस ध्यान रखें कि उसमें अंडे का पीला हिस्सा नहीं होना चाहिए।

एल्कोहल का सेवन कम कर दें

एल्कोहल ब्रेन हेमरेज का खतरा बढ़ाता है। एल्कोहल से रक्तचाप का स्तर बढ़ता है, जिससे धमनी की अंदरूनी दीवार को नुकसान पहुंचाता है। इसका यह मतलब है कि मस्तिष्क खून का प्रवाह कम हो जाता है शराब के अधिक सेवन से हृदय को भी नुकसान पहुंचता है जिससे धड़कनों में गड़बड़ी की समस्या होती है। इसके परिणामस्वरूप, हृदय में थक्के बन सकते हैं, जिससे मस्तिष्क में खून का प्रवाह कम हो सकता है।

धूम्रपान बंद करें

स्ट्रोक निकोटीन से नहीं बल्कि धुए से होता है। धूम्रपान स्ट्रोक के खतरे को तीन गुना बढ़ा देता है इसलिए इसका सेवन बंद करना आवश्यक है। जब आप धूम्रपान करते हैं, आप धुए को अंदर लेते हैं, जिसमें 7000 से ज्यादा जहरीले केमिकल मिले होते हैं। ये केमिकल आपके फेफड़ों से गुजरते हुए आपके पूरे शरीर के खून में मिल जाते हैं, जो शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं।

Comments

Avnish 1 month ago

Nice


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