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।।  माँ को श्रद्धांजलि ।।
ऐसी होती है माँ

आप जानते है माँ एक ऐसा शब्द है जिसमें सम्पूर्ण संसार समाया हुआ है। अगर माँ न होती तो किसी को जन्म नहीं मिलता, ये पूरा संसार बंजर होता, हर किसी के जीवन में माँ का होना बहुत जरूरी है बिना माँ के जीवन असंभव सा लगता है। हम सभी की माँ ने अपनी जान जोखिम में डाल कर ही हमको जन्म दिया है उनका यह बलिदान हम जिंदगी भर नहीं भूल सकते है। आज तक हमारी माँ ने ही हमारे लिए सब कुछ किया है और हम सभी कहीं न कहीं उनका दिल दुखा ही देते है। अनजाने में ही कई बार हम सभी अपनी माँ को दुख पहुंचा ही देते है। आज हम सभी अपनी माँ से माफी मांगने और उनकी लंबी उम्र की कामना करते है। दुनिया में कुछ ओर चीज दोबारा पायी जा सकती होगी लेकिन अपनी माँ को दोबारा पाना समुंदर में से छोटे पत्थर को निकालने जैसा है।

माँ जैसा कोई नहीं है। भगवान भी माँ के आगे सिर झुकाते है, माँ ना होती तो इस संसार की कल्पना करना सच में बहुत ही मुश्किल होता। जब सुबह होती है तो माँ का चेहरा देखना उतना ही जरूरी होता है जितना की एक भूखे को खाना मिलना। एक बच्चे की सबसे प्रथमगुरु माँ ही होती है। उसे माँ ही चलना सिखाती है, बोलना सिखाती है, माँ ने अपने जीवन में अपने बच्चों की खुशी के अलावा कुछ नहीं चाहा है, अपने बच्चों की खुशी के आगे हमेशा नतमस्तक किया है। पता नहीं माँ आपको क्या समझूँ, भगवान का भेजा हुआ वरदान या फिर स्वयं भगवान।

माँ का किरदार निभाना केवल माँ ही जानती है। माँ ने अपने जीवन में अपने बच्चों की खुशी के अलावा कभी भी कुछ नही सोचा है इसीलिए शायद वो घर में सबसे साधारण रहती है। माँ के बिना हम में से कोई भी अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकता।

चन्द्रगुप्त मौर्य भी अपनी माता के सम्मान और उनसे प्यार के कारण एक आम व्यक्ति से वीर योद्धा बना और अपनी माँ के लिए मगध् को जीत कर दिखाया। एक माँ अपने बच्चे के लिए हमेशा ही प्रेम दर्शाती है माँ का प्यार कभी भी अपने बच्चे के लिए कम नहीं होता है। ‘‘पूत कपूत सुने है पर ना कभी सुनी कुमाता’’ इसका अर्थ है कि हमने बेटे और गंदे बेटे दोनों ही देखे है गंदे बेटे से अर्थ है जो गंदी राह पर जैसे चोरी, अपराध् आदि जैसे रास्ते पर चलते है जो की गलत है लेकिन माँ फिर भी अपने उस बेटे से प्यार करती है।

देखा जाए तो इस दुनिया में जन्म लेने से लेकर इस दुनिया से जाने तक हम अपने जीवन में कई रिश्तों की संरचना कर जाते हैं। कुछ रिश्ते थोड़ी देर के लिए बनाए जाते हैं, कुछ हमें धोखा दे जाते हैं, कुछ हमें छोड़ देते हैं कुछ समय पर काम नहीं आते और कुछ हमारा हर तरह के सुख-दुःख में साथ निभाते हैं पर एक व्यक्ति जो किसी इंसान की बिना लालच के देखभाल, स्नेह और प्यार करती है वह माँ है।

हमें इस बात को कभी नहीं भूलना चाहिए कि हमारे जन्म के समय के बाद से ही हम हर चीज के लिए अपनी माँ पर निर्भर रहते थे और आज भी हमारे शरीर का अहम भाग हमारी माँ ही है। माँ बचपन से ही हमारा पालन-पोषण करती है सही राह दिखती है। माँ की ममता और माँ का प्यार और स्नेह अतुलनीय है। हमारी मां हमारी सुरक्षा ढाल है जो हमें हर प्रकार के हमलों और कठिनाइयों से बचाती है। वह अपने सभी दुःखों को भूल अपने बच्चे की जरूरतों को पूरा करती है। माँ के बुढ़ापे में उनका खास ध्यान रखना है अपने जीवन का लक्ष्य यही होना चाहिए की माँ को किसी भी तरह दुख पहुँचने और उनकी खुशी का ही काम करना है।

आज हम सभी ये प्रण लेते है की भूले से भी हमारी माँ की आँखों में आँसू नहीं आयेगा और अपनी माँ को दिल से धन्यवाद कहेंगे की माँ आपने हमारे जीवन के लिए बहुत कुछ किया है और हम भी आपका ताउम्र ख्याल रखेंगे।

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