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लापरवाही, सुस्ती एवं फिजूलखर्ची के कारण ही आर्थिक कठिनाइयाॅ उत्पन्न होती हैं

*याद रखें, लापरवाही काम बिगाड़ती है और सुस्ती जिन्दगी एवं वक्त दोनों बिगाड़ती है। चुस्ती, फुर्ती और सतर्कता व्यक्तिगत एवम् सार्वजनिक जीवन में कामयाबी के झण्डे गाढ़ती है। यह भी याद रखें, आपकी समस्यायें आप द्वारा ही सृजित हैं, अधिकांश कठिनाइयां आप द्वारा ही अर्जित हैं अर्थात् आपकी समस्याओं के कारण भी आप ही हैं और निवारण भी आप ही हैं।

*यदि आप खुद के प्रति लापरवाह रहेंगे तो अपने परिवार, समाज, देश, व्यवसाय सबके प्रति लापरवाह रहेंगे। आपकी यह लापरवाही ही आपकी तबाही की सबसे बड़ी वजह होगी। जब आप खुद की परवाह करेंगे तो दूसरे भी आपकी परवाह करेंगे। जब आप वक्त और धन की परवाह करेंगे तो वक्त और धन भी आप की परवाह करेगा।

*जिस प्रकार बड़ी से बड़ी नाव को डूबोने के लिए छोटे से छोटा छेद ही काफी होता है, उसी प्रकार मजबूत से मजबूत माली हालत को डांवाडोल करने के लिए फिजूलखर्ची का छोटा सा छिद्र की काफी होता है। एक पैसा बचाने का अर्थ होता है, दो पैसे अतिरिक्त कमाना। आय के बराबर खर्च करने का अर्थ होता है, भविष्य को दांव पर लगाना। आय से अधिक खर्च करने पर भविष्य की तो छोड़िए, वर्तमान खुशियां भी छिन्न-भिन्न हो जाती हैं।

*आदमी अपनी आमदनी का बहुत बड़ा हिस्सा अक्सर फिजूल ही खर्च कर देता है। समझदार व्यक्ति पानी, बिजली, फोन, वाहन, वस्त्र, विलासिता , आने-जाने आदि में से काफी बचत कर सकता है। जो बचाता है वही कमाता है। बचत के बिना तो कमाई का कोई अर्थ ही नहीं है। चुस्ती-फुरती के बिना जिन्दगी का कोई औचित्य नहीं है।

*पान, बीडी, शराब, जुआ आदि नशीली, खर्चीली और खतरनाक वस्तुओं से बच कर रहें। यदि कोई बुरा व्यसन आपके साथ जुड़ गया हो तो उसे तत्काल छोड़ दें। इच्छा शक्ति को सुदृढ़ करें, तब ही आप बुरी आदतों को छोड़ पायेंगे। जरूरत के हिसाब से ही खर्चा करें जहां तक हो सके दिखावा नहीं करें यह सब फिजूलखर्ची में ही आता है।

*पैसा जो बचाओगे, वो वक्त के साथ-साथ बढ़ेगा ही। बचत के कारण ही आमदनी का ग्राफ ऊपर चढ़ेगा। जब भी खर्च करें, यही सोच कर करें कि पैसा किसी की अमानत है। और उसे वापस लौटाना भी है। आपने कुछ बचा लिया तो, समझो पैसों का पेड़ लगा दिया। याद रखें, फिजूलखर्ची पर अंकुश लगा कर ही आप पैसों का पेड़ लगा सकते हैं।

*अमीर लोगों के साथ बाजार की सैर न करें। जाना भी पड़े तो खरीददारी न करें। अपनी कीमत जाननी हो तो किसी से उधार मांग कर देखें। अगर धन की कीमत जाननी हो तो किसी को उधार देकर देखें। फालतू के खर्चों पर यदि रोक नहीं लगाओगे तो एक दिन शोक प्रकट करने के लिए कुछ नहीं बचेगा। सुस्ती की आदत में सुधार नहीं करोगे तो एक दिन आपके पास करने के लिए कुछ भी नहीं बचेगा।

*अपनी आमदनी का कम से कम 25 प्रतिशत तो अवश्य बचायें। बचत के लिए अनावश्यक खर्चों को फिलहाल स्थगित रखें। किसी नये व्यवसाय के लिए यदि बचत से काम न चले तो उधार लें। उधार चुकाने के लिए अपनी बचत को बढ़ायें। पर याद रखें उधार चुकाने के लिए कभी उधार न लें। ऐसी विलासितायें, ऐसी सुविधायें तो सरकारों के लिए छोड़ दें।

दृष्टान्त

दो मित्र थे, एक अमीर व दूसरा गरीब। दोनों साथ पढ़ते थे। अमीर लापरवाह एवम् खर्चीला था। गरीब अत्यन्त ही संयमी एवम् परिश्रमी था। गरीब मित्र, अपने अमीर मित्र को खूब टोकता था, किन्तु अमीर पर कोई असर नहीं हुआ। अमीर ने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। गरीब ने प्रथम श्रेणी में एम.ए किया और अध्यापक बन गया। अमीर ने अपना पुश्तैनी धन्धा संभाला, किन्तु आलस्य, लापरवाही एवम् फिजूलखर्ची के कारण करोड़ों की सम्पत्ति बिक गई। बुरी आदतों एवम् व्यसनों के कारण वह जल्दी ही सड़क पर आ गया। करीब बीस साल बाद दोनों मित्रों की हाॅस्पिटल में अचानक मुलाकात हो गई। गरीब मित्र तब तक प्रिन्सीपल बन चुका था और अमीर मित्र कर्जदार और मर्जदार। शरीर से काफी कमजोर हो चुका था। मिलते ही एक दूसरे से गले मिल गये। अमीर दोस्त फूट-फूट कर रोने लगा। उसने पछताते हुए बताया कि यदि मैं तुम्हारी दी सलाह पर चलता तो आज शहर का सबसे अमीर व्यक्ति होता। मित्र नेे समझाया- जो होना था, हो गया। अब भी वक्त है। नये सिरे से जीवन की शुरूआत कर सकते हो।

Comments

Avnish 3 months ago

Great


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