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योजना किसी की भी हो, पर आपके  अनुकूल हो

यदि आप दूसरों की योजनाओं से भी बेहतर योजना बनाने के लिए सक्षम हैं तो अपनी योजना अलग से ही तैयार करें और उस पर प्रभावी ढंग से अमल करें किन्तु यदि आप योजना बनाने के लिए सक्षम नहीं है या आपके पास पर्याप्त समय नहीं है, तब दूसरोें की योजना अपनाने में कोई हर्ज नहीं है बशर्ते कि योजना आपके लिए अनुकूल हो।

व्यक्ति अक्सर दूसरों को वही योजना सुझाता है, जिस पर वह खुद अमल नहीं कर पाता है इसलिए दूसरों के द्वारा सुुझाई गई योजना को हाथ में लेने से पूर्व उस पर गहराई से विचार करें। क्या आप ऐसी ही किसी योजना की तलाश में थे? क्या यह योजना, समय और स्थान के सर्वथा अनुकूल है? क्या योजना की क्रियान्विति के लिए आर्थिक एवं भौतिक संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे? क्या योजना लम्बे समय तक लाभ देती रहेगी? आदि सभी प्रश्नों पर गहन चिन्तन करने के बाद ही योजना पर अमल आरम्भ करें।

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जिस योजना पर दूसरों के द्वारा अमल किया जा चुका है, जिस योजना से आस-पास के लोग लाभान्वित हो रहे हैं, उसे अपनाने में कोई अड़चन नहीं होनी चाहिए। क्योंकि ऐसी योजना का ढांचा तैयार मिलता है। कच्चा माल, काॅस्टिंग, मार्केटिंग, मार्जिन आदि का खाका तैयार मिलता है। जिसे अपनाने से आपका प्रारम्भिक समय, श्रम एवं धन बचेगा।

व्यक्ति दूसरों को देख कर ही चलना सीखता है। क्योंकि किसी न किसी से प्रेरित होकर ही सफलता की सीढ़ियां चढ़ सकता है अर्थात् आप दूसरों की सफल योजनाओं के माध्यम से ही अपनी योजना को सफलता में बदल सकते हैं।

किसी असफल व्यक्ति के पास भी बढ़िया से बढ़िया योजनायें हो सकती हैं बार-बार हारने वाले के पास भी जीत की संभावनायें हो सकती हैं इसलिए योजना किसी की भी हो, आप उस पर चलकर सफल हो सकते हैं इसलिए आप को योजना के हर पहलू जैसे सफलता और विफलता का गहन विश्लेषण करना चाहिए। पूरे आत्मविश्वास के साथ योजना पर अमल करना होगा। तब यही योजना आपकी पहचान बन जायेगी।

जब आप किसी से सीखना चाहेंगे तो सिखाने वाला भी अपनी समूची ताकत सिखाने मे लगा देगा। याद रखें, अपने अहम् के साथ खड़े होकर आप कुछ भी नहीं सीख सकेंगे। सीखने के लिए अपने अहम को छोड़ना होगा, तब ही आप कुछ सीख पायेंगे इसलिए सदैव जिज्ञासु बने रहें। जिस योजना अथवा सलाह पर आप अमल कर सकते हैं, अवश्य करते रहें।

कोई भी सफल व्यक्ति जन्मजात सफल नहीं होता। दूसरों की सफलताओं को अपनी कल्पनाओं से जोड़कर ही कोई व्यक्ति सफल हो सकता हैं। आप दूसरों की नाकामयाबी को अपनी कामयाबी बना सकते हैं, बशर्ते कि आप में हौसला और सद्भावना हो। और हमेशा कामयाब लोगों से प्रेरित होने के लिए तैयार रहो।

बिना सोचे-समझे किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा अपनाये गये शाॅर्टकट को अपनाने की भूल न करें। कहीं ऐसा न हो कि शाॅर्टकट को ढूँढ़ने में ही इतना समय लग जाए कि इतने समय में तो आप लम्बे रास्ते से ही पहुँच सकते थे। यह भी अपेक्षित नहीं है कि दूसरे का तथाकथित शाॅर्टकट आपके लिए भी शाॅर्टकट ही साबित हो। जिसे आप दूसरे का शाॅर्टकट समझते हैं, हो सकता हैं, यह उसके लिए शाॅर्टकट ही नहीं रहा हो इसलिए अपना शाॅर्टकट अपने अनुभवों के आधार पर बनायें।

दृष्टान्त

एक उत्साही युवक ने प्रथम श्रेणी में एम.ए. किया। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भरपूर तैयारी की किन्तु दुर्भाग्यवश किसी भी सेवा के लिए चयन नहीं हो सका। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अपने जीवन के अनमोल पांच साल लगा दिये जबकि उसके एक साथी का केन्द्रीय सेवाओं में चयन हो चुका था। एक दिन साथी ने एक योजना सुझायी। साथी ने बताया कि यदि उसका चयन नहीं होता तो वह इसी योजना पर अमल करता। योजना थी, प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले प्रतियोगियों को प्रशिक्षण देना। उत्साही युवक ने इस योजना पर तत्काल कार्य आरम्भ कर दिया। प्रारम्भ मंे कोचिंग क्लासेज अपने घर पर ही शुरू कर दी। उसने खूब मेहनत की। धीरे-धीरे प्रचार बढ़ा, अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ने लगी। किराये का भवन ले लिया गया। कुछ अच्छे विशेषज्ञ/प्रशिक्षक भी रख लिये। देखते ही देखते अभ्यर्थियों की संख्या काफी बढ़ गई। आमदनी भी तद्नुसार बढ़ती गई। तत्सम्बन्धी कुछ पुस्तकें भी प्रकाशित करवा दी गईं। चार-पांच साल में ही उसकी आमदनी योजना बताने वाले साथी के वेतन से कई गुना हो गई। यह अच्छा ही हुआ कि उसका किसी सेवा के लिए चयन नहीं हुआ।

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